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चाँद सी मोहक अदाएं हैं जिसकी,
वो मेरी महबूबा है,
चन्दन सा आकर्षण और कुमकुम    सी  कोमलता है जिसकी
वो मेरी महबूबा है !

दीप सी दमकती आभा है जिसकी
वो मेरी महबूबा है,
सलोनी सी सूरत और तुलसी सी    पवित्रता है जिसकी,
वो मेरी महबूबा है !

हिम सी शीतलता है जिसमें
नीर सी चंचलता है उसमें
कोयल सी आवाज़ वाली
वो मेरी महबूबा है,
वो मेरी महबूबा है !

कनक सा कलेवर है जिसका
नीलम सा निखार है उसका
मधु सी मिठास वाली
वो मेरी महबूबा है
वो मेरी महबूबा है !

चाँद सी मोहक अदाएं हैं जिसकी
वो मेरी महबूबा है
वो मेरी महबूबा है !!

समय के सफ़र में प्रहर जब रात का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !

मंजिल की दौर में प्रहर जब हार का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !

जीत की ख़ुशी में, हार के गम में,
याद आ गया वो अपना साथी जो था !

मन के अन्तः करण में जब प्यार को संजोया,
याद आ गया वो अपना साथी जो था !

नित्य कृत पर्व में, गर्त में, प्रशाध्य में,
श्रीन्खलाय मार्ग में, ज्ञान के प्रवाह में,
सांख्य स्मृति में, जीवन के अध्याय में,
हर पल के बहाव में,
याद आ गया वोह अपना साथी जो था,
याद आ गया वोह अपना साथी जो था !

मेघ के प्रवाह में प्रहर जब वेदना का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !

समय के सफ़र में प्रहर जब हार का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !!


प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है,
जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !


सावन की फुहार में, चांदनी रातों में,
पतझड़ के मौसम में और सर्दी की ठंढ में,
हर दिन हर पल गीत नए गाना है,
दिल के गलियारे में, यादों को सजाना है !

तुम्हारी चहचहाती हंसी और मद भरी आँखों से,
हर दिन सरगम के नए छंद कोई गुनगुनाना है,
हर राह हर सफ़र हसते हुए बीतना है,
जीवन के हर छन को यूँही रंगीन बनाना है !

प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है,
जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !

खुबसूरत थे वोह पल जब तुम साथ थे

मासूम थे वोह पल जब तुम साथ थे

नाज़ था हमे खुद पे जब तुम साथ थे

जलते थे लोग हमसे जब तुम साथ थे


आजकल तो बस हम खयालो में रहते है

दुनिया की हर खबर से बेखबर रहते हैं

लोग कहते हैं आजकल हम पागल से दीखते हैं


कुछ तो था जो बदल गया

सुबह की वोह मीठी बातें हमे आज भी सताती है

शाम की वोह तीखी बातें दिल को दुखाती हैं

कोई साथी तो था जो बदल गया


भीड़ में भी खुद को तनहा पाते हैं,

जब याद आते हैं वोह पल, जब तुम साथ थे

महफिल में भी रुला जाते हैं

जब याद आते हैं वोह पल, जब तुम साथ थे

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा 
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा 

प्रीत के संग छेडो तराने
 कुछ लम्हे पुराने 
और गाओ सा रा रा रा 

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा 
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा 

महकते फूलों की शोभा बढाओ 
इस बेला में..  
इस बेला में उनको भी थोडा सहलाओ 
और गाओ..  
और गाओ सा रा रा रा 

थोडी गीली उनकी हथेली कराओ 
रस वालों को..
रस वालों कों थोडा सा रस तुम चखाओ 
और गाओ… 
और गाओ सा रा रा रा 

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा 

चंपा के संग चमेली को भी नेहलाओ 
रग रग में रंगों की धार बहाओ 
और गाओ.. 
और गाओ सा रा रा रा 

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा ..
ख्वाबो की क्यारी है
फूलो से न्यारी है
रात की चाँदनी
चकोर की दीवानगी
और सपनो की रवानगी है

पल में जीना पल में भुझना
दर्पण के जैसी नादानी है
दिल के पुस्तक की कोई कविता
और सौंदर्य को चित्रित करती कोई सरिता है

परी के जैसी सुन्दरता है
और बुलबुल के जैसी चंचलता है
कहने को तो पुरा जहाँ कम है
हम तो सिर्फ़ इतना कहेंगे की
वो सबसे प्यारी है
वो सबसे प्यारी है
 कभी पलकों पे आंसू आते हैं
तो कभी लब थरथराते हैं,
कभी दिल में बेचैनी होती है
तो कभी साँसे थम सी जाती हैं
कभी ख़ुद की धड़कन पढ़ते हैं
तो कभी धड़कन में ज़िन्दगी ढूँढा करते हैं

कभी शब्दों का सृजन करते हैं
तो कभी शब्दों की परिभाषा ढूँढा करते हैं
कभी महल की भव्यता देखते हैं
तो कभी रज कणों में महल ढूँढा करते हैं

कभी लक्ष्य का पीछा करते हैं
तो कभी राहों में खो से जाते हैं
कभी उम्मीद का दामन पकड़ते हैं
तो कभी ख़ुद का दामन छूट जाता है
कभी वक्त के साए में जीते हैं
तो कभी जीने का मतलब ढूँढा करते हैं

गर्मी की उस दोपहर में

हम जा बैठे पेड़ की छाव में

वहा हमने देखा ज़मीन पे बिखरे पड़े थे कुछ पत्ते

शायद कुछ दर्द छिपे थे उनके दामन में

शायद कुछ लब्ज़ अभी बाकी थे


हमने उनकी खामोशी को टटोला

उनके ज़ख्मो को थोड़ा सहलाया

उनके बिखरे ज़ज्बातों पे एक मरहम लगी थी

शायद उनके बुझते मन को एक आश मिली थी


सूखते आंसुओं के बीच से हमने उनकी आँखों को पढ़ा

मद्धम पड़ती साँसों के रफ़्तार को हमने जाना

कांपती जुबान से उन्होंने सुनाया अपने दिल का हाल

और फ़िर समझा हमने बेरहम पेड़ की चाल


पत्ते बोले,

एक ऐसा ज़माना था जब हम पेड़ की जान हुआ करते थे

उसकी सांसो की रफ़्तार हुआ करते थे

हमसे शुरू होती थी उसकी ज़िन्दगी

और हमी से होती थी उसकी बंदगी

हमारी सुबह उसके लिए लाती थी आशा की एक नई किरण

हमारी हरियाली में छिपा था उसका जीवन मरण


फ़िर आया एक दिन हमारी हरियाली हुई थोडी मद्धम

अब बारी थी पेड़ की

हमे आशा थी थोड़े दुलार की

थोडी वफ़ा की और थोड़े प्यार की

पेड़ ने फ़िर खायी पलटी

बना लिए कुछ नए रिश्ते

कुछ नए हमसफ़र

तोड़ लिया हमसे नाता

और ला दे पटका हमे इस धूल में

पेड़ की इस बेरुखी ने हमारी सारी उमीदों को तोड़ दिया

और उसके बाद ज़िन्दगी ने भी हामारा दामन छोड़ दिया


हमने फ़िर उनको समझाया

उनका हौसला बढाया

हमने कहा ये तो ज़िन्दगी का दस्तूर है

आप चाहो छाव तो मिलता धुप है 

फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने,

कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ

ऐसा सोचा था हमने.. २


सपनो की होगी एक दुनिया, कुछ पल होंगे अनोखे,

हल्की सी होगी बारिस और कुछ बुँदे होंगे बिखरे,

सुबह होगी सुहानी सी और शाम होगी मस्तानी सी,

रात को तारो के संग कुछ पल होंगे अपने,

ऐसा सोचा था हमने.. २


देखी थी एक मंजिल और इरादे किए थे पक्के,

ख़ुद पे था भरोसा और कदम उठे थे सच्चे,

दोस्ती की होगी बहार और प्यार की होगी बरसात,

राह में मिलेंगे सारे अपने,

ऐसा सोचा था हमने.. २


फ़िर आया एक भूचाल, उजड़ गया वो बाग़,

बारिस के साथ में आ गया तूफान,

सुबह हो गई अनजानी सी और शाम हो गई बेगानी सी,

ना रही वो मंजिल ना रहे वो इरादे,

ना रही दोस्ती ना रहा प्यार,

रह गई बस आन्सूवों की बोछ्हार,


आज फ़िर से देखा सपनो को टूटते हमने,

चल पड़े हम फ़िर से दुनिया को समझने,

शायद मिल जाए हमे फ़िर से कुछ अपने,

ऐसा सोचा है हमने.. २ 

हर शाम को हम उनका नाम लिया करते हैं

दिल के ज़ख्मो को थोड़ा और ताज़ा करते हैं

उनकी खुशियों के किस्से तमाम गढ़ते हैं

एक उम्मीद, एक आशा में जिया करते हैं

कुछ बातें, कुछ कसमे याद करते हैं

और उनकी बेवफा आँखों में हम आज भी वफ़ा ढूँढा करते हैं

लोग कहते हैं,

हम गम के सौदागर हैं, गमो का सौदा करते हैं 

अपनी मुस्कराहट बेच देते हैं और उनका गम खरीद लेते हैं 

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