कभी पलकों पे आंसू आते हैं
तो कभी लब थरथराते हैं,
कभी दिल में बेचैनी होती है
तो कभी साँसे थम सी जाती हैं
कभी ख़ुद की धड़कन पढ़ते हैं
तो कभी धड़कन में ज़िन्दगी ढूँढा करते हैं
कभी शब्दों का सृजन करते हैं
तो कभी शब्दों की परिभाषा ढूँढा करते हैं
कभी महल की भव्यता देखते हैं
तो कभी रज कणों में महल ढूँढा करते हैं
कभी लक्ष्य का पीछा करते हैं
तो कभी राहों में खो से जाते हैं
कभी उम्मीद का दामन पकड़ते हैं
तो कभी ख़ुद का दामन छूट जाता है
कभी वक्त के साए में जीते हैं
तो कभी जीने का मतलब ढूँढा करते हैं
काफ़ी अच्छा लिखा है और प्रयत्न शैली में निखार लायेगा