जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !
सावन की फुहार में, चांदनी रातों में,
पतझड़ के मौसम में और सर्दी की ठंढ में,
हर दिन हर पल गीत नए गाना है,
दिल के गलियारे में, यादों को सजाना है !
तुम्हारी चहचहाती हंसी और मद भरी आँखों से,
हर दिन सरगम के नए छंद कोई गुनगुनाना है,
हर राह हर सफ़र हसते हुए बीतना है,
जीवन के हर छन को यूँही रंगीन बनाना है !
प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है,
जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !

Nice!! words Nitesh…. pls keep it up….
Wah Wah…very nice said