Posted in Kavita, Poem, कविता, प्यार, यादें, tagged जब तुम साथ थे, दिल, दोस्ती, प्यार, याद, यादें, jab tum sath the on June 19, 2009 | 1 Comment »
खुबसूरत थे वोह पल जब तुम साथ थे
मासूम थे वोह पल जब तुम साथ थे
नाज़ था हमे खुद पे जब तुम साथ थे
जलते थे लोग हमसे जब तुम साथ थे
आजकल तो बस हम खयालो में रहते है
दुनिया की हर खबर से बेखबर रहते हैं
लोग कहते हैं आजकल हम पागल से दीखते हैं
कुछ तो था जो [...]
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Posted in Holi, Kavita, Song, कविता, tagged गुलाल, रंग, होली, होली गीत, Holi, Holi Geet on March 10, 2009 | 3 Comments »
आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा
प्रीत के संग छेडो तराने
कुछ लम्हे पुराने
और गाओ सा रा रा रा
आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा
महकते फूलों की शोभा बढाओ
इस बेला [...]
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Posted in Kavita, कविता, सुन्दरता, tagged खूबशुरती, ख्वाब, पल में जीना, बुलबुल, वो सबसे प्यारी है, Beauty, bulbul on January 3, 2009 | 2 Comments »
ख्वाबो की क्यारी है
फूलो से न्यारी है
रात की चाँदनी
चकोर की दीवानगी
और सपनो की रवानगी है
पल में जीना पल में भुझना
दर्पण के जैसी नादानी है
दिल के पुस्तक की कोई कविता
और सौंदर्य को चित्रित करती कोई सरिता है
परी के जैसी सुन्दरता है
[...]
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Posted in Kavita, Poem, कविता, जीवन, tagged उम्मीद, कभी आंसू, जीवन, पलक, बेचैनी, हिन्दी कविता, Hindi Poem on December 24, 2008 | 1 Comment »
कभी पलकों पे आंसू आते हैं
तो कभी लब थरथराते हैं,
कभी दिल में बेचैनी होती है
तो कभी साँसे थम सी जाती हैं
कभी ख़ुद की धड़कन पढ़ते हैं
तो कभी धड़कन में ज़िन्दगी ढूँढा करते हैं
कभी शब्दों का सृजन करते हैं
तो कभी शब्दों की परिभाषा ढूँढा करते हैं
कभी [...]
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Posted in Kavita, Poem, कविता, tagged ज़िन्दगी का दस्तूर, पेड़ और पत्ते, हिन्दी कविता, Hindi Kavita, Poem, Zindagi, Zindagi ka Dastoor on December 22, 2008 | 6 Comments »
गर्मी की उस दोपहर में
हम जा बैठे पेड़ की छाव में
वहा हमने देखा ज़मीन पे बिखरे पड़े थे कुछ पत्ते
शायद कुछ दर्द छिपे थे उनके दामन में
शायद कुछ लब्ज़ अभी बाकी थे
हमने उनकी खामोशी को टटोला
उनके ज़ख्मो को थोड़ा सहलाया
उनके बिखरे ज़ज्बातों [...]
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फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने,
कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ
ऐसा सोचा था हमने.. २
सपनो की होगी एक दुनिया, कुछ पल होंगे अनोखे,
हल्की सी होगी बारिस और कुछ बुँदे होंगे बिखरे,
सुबह होगी सुहानी सी और शाम होगी मस्तानी सी,
रात को तारो के संग कुछ पल [...]
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Posted in Kavita, कविता, tagged गम, ज़ख्म, सौदागर, Gam, Poem, Saudagar, zakhm on December 17, 2008 | 2 Comments »
हर शाम को हम उनका नाम लिया करते हैं
दिल के ज़ख्मो को थोड़ा और ताज़ा करते हैं
उनकी खुशियों के किस्से तमाम गढ़ते हैं
एक उम्मीद, एक आशा में जिया करते हैं
कुछ बातें, कुछ कसमे याद करते हैं
और उनकी बेवफा आँखों में हम आज भी वफ़ा ढूँढा करते हैं [...]
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