फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने, कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ ऐसा सोचा था हमने.. २ सपनो की होगी एक दुनिया, कुछ पल होंगे अनोखे, हल्की सी होगी बारिस और कुछ बुँदे होंगे बिखरे, सुबह होगी सुहानी सी और शाम होगी मस्तानी सी, रात को तारो के संग कुछ [...]
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~~ ऐसा सोचा है हमने ~~
Posted in कविता, Kavita, tagged अपने, ऐसा सोचा है हमने, सपने, dream, Poem on दिसम्बर 18, 2008 | 9 Comments »