हर शाम को हम उनका नाम लिया करते हैं
दिल के ज़ख्मो को थोड़ा और ताज़ा करते हैं
उनकी खुशियों के किस्से तमाम गढ़ते हैं
एक उम्मीद, एक आशा में जिया करते हैं
कुछ बातें, कुछ कसमे याद करते हैं
और उनकी बेवफा आँखों में हम आज भी वफ़ा ढूँढा करते हैं [...]
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~~ गम के सौदागर ~~
Posted in Kavita, कविता, tagged गम, ज़ख्म, सौदागर, Gam, Poem, Saudagar, zakhm on December 17, 2008 | 2 Comments »