प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है, जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है ! सावन की फुहार में, चांदनी रातों में, पतझड़ के मौसम में और सर्दी की ठंढ में, हर दिन हर पल गीत नए गाना है, दिल के गलियारे में, यादों को सजाना है ! तुम्हारी चहचहाती [...]
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जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है..
Posted in Uncategorized, tagged जीवन, दर्पण, सरगम, सावन की फुहार, Hindi, Love, Poem on दिसम्बर 9, 2009 | 2 Comments »
~~ ज़िन्दगी का दस्तूर ~~
Posted in कविता, Kavita, Poem, tagged ज़िन्दगी का दस्तूर, पेड़ और पत्ते, हिन्दी कविता, Hindi Kavita, Poem, Zindagi, Zindagi ka Dastoor on दिसम्बर 22, 2008 | 7 Comments »
गर्मी की उस दोपहर में हम जा बैठे पेड़ की छाव में वहा हमने देखा ज़मीन पे बिखरे पड़े थे कुछ पत्ते शायद कुछ दर्द छिपे थे उनके दामन में शायद कुछ लब्ज़ अभी बाकी थे हमने उनकी खामोशी को टटोला उनके ज़ख्मो को थोड़ा सहलाया उनके बिखरे ज़ज्बातों पे एक मरहम लगी थी शायद [...]
~~ ऐसा सोचा है हमने ~~
Posted in कविता, Kavita, tagged अपने, ऐसा सोचा है हमने, सपने, dream, Poem on दिसम्बर 18, 2008 | 9 Comments »
फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने, कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ ऐसा सोचा था हमने.. २ सपनो की होगी एक दुनिया, कुछ पल होंगे अनोखे, हल्की सी होगी बारिस और कुछ बुँदे होंगे बिखरे, सुबह होगी सुहानी सी और शाम होगी मस्तानी सी, रात को तारो के संग कुछ [...]
~~ गम के सौदागर ~~
Posted in कविता, Kavita, tagged गम, ज़ख्म, सौदागर, Gam, Poem, Saudagar, zakhm on दिसम्बर 17, 2008 | 3 Comments »
हर शाम को हम उनका नाम लिया करते हैं दिल के ज़ख्मो को थोड़ा और ताज़ा करते हैं उनकी खुशियों के किस्से तमाम गढ़ते हैं एक उम्मीद, एक आशा में जिया करते हैं कुछ बातें, कुछ कसमे याद करते हैं और उनकी बेवफा आँखों में हम आज भी वफ़ा ढूँढा करते हैं लोग कहते हैं, [...]