गर्मी की उस दोपहर में हम जा बैठे पेड़ की छाव में वहा हमने देखा ज़मीन पे बिखरे पड़े थे कुछ पत्ते शायद कुछ दर्द छिपे थे उनके दामन में शायद कुछ लब्ज़ अभी बाकी थे हमने उनकी खामोशी को टटोला उनके ज़ख्मो को थोड़ा सहलाया उनके बिखरे ज़ज्बातों पे एक मरहम लगी थी शायद [...]
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~~ ज़िन्दगी का दस्तूर ~~
Posted in कविता, Kavita, Poem, tagged ज़िन्दगी का दस्तूर, पेड़ और पत्ते, हिन्दी कविता, Hindi Kavita, Poem, Zindagi, Zindagi ka Dastoor on दिसम्बर 22, 2008 | 7 Comments »